मंगलवार, अगस्त 04, 2009

राजधानी में विकास का नेपथ्य और भविष्य

राजधानी में विकास का नेपथ्य और भविष्य
वीरेन्द्र जैन

राजधानी चाहे देश की हो या प्रदेशों की , वे बहुत तेजी से फल फूल रही हैं। कहने की जरूरत नहीं कि उनका यह विकास देश के अन्य क्षेत्रों के विकास की कीमत पर हो रहा है। गांवों और कस्बों में रहने वालों में भी राजधानी में पहुंचने के सपने पलते रहते हैं। राजधानियों के इस आकर्षण के पीछे वहां विकसित अच्छे मार्ग, अच्छे शिक्षा संस्थान, अच्छी चिकित्सा सुविधाएं,निरन्तर विद्युत आपूर्ति, आवागमन के प्रचुर साधन, कल्पवृक्षी बाजार, रोजगारों की अपेक्षाकृत बेहतर सम्भावनाएं,बेहतर कानून व्यवस्थाएं, मीडिया की उपस्तिथि के कारण न्याय की उम्मीदें आदि हैं ।
ये सुविधाएं भले ही मंहगी हैं पर उन लोगों के लिए उपलव्ध तो हैं जिनके लिये मंहगाई कोई समस्या नहीं है। असल में सचाई तो यह है कि राजधानियां उन लोगों का निवास स्थल बनती जा रही हैं जिनके पास भरपूर पैसा है और जिसे खर्च करने में उन्हें कहीं कोई कचोट महसूस नहीं होती। इस बेतरतीब फैलाव से न केवल मंहगाई ही बढ रही है अपितु आवश्यक सेवायें भी मँहगी होती जा रही हैं जिससे इन क्षेत्रों के मूल निवासियों की परेशानियां बढ रही हैं।

राजधानियों में बसते चले जाने वाले इन लोगों का आर्थिक सामाजिक अध्ययन दिलचस्प है।नगर के किनारों की ताजा हवा वाली नई नई कालोनियों में रिटायर्ड लोगों की भरमार है। लगभग नव्बे प्रतिशत न्यायाधीश,आई.ए.एस.,आई.पी.एस. और प्रथम श्रेणी अधिकारी सेवा निवृत्ति के बाद राजघानी में ही बसना पसन्द करते हैं जहां उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद वाली मुफ्त स्वास्थ सुविधाएं तो मिलती ही हैं,साथ ही उच्चकोटि की बैंकिंगसुविधाएं,शेयरबाजार आदि में निवेश की सुविधाएं व वांछित मनोरंजन की समस्त सुविधाएं भी उपलव्ध होती हैं। देश में व्याप्त भ्रष्टाचार को देखते हुये यह कहना गलत नहीं होगा कि उपरोक्त सेवानिवृत्त अधिकारियों में से अधिकांश के पास उनकी वैधानिक कमाई से कहीं बहुत अधिक धन उनकी अवैध कमाई का होता है । अपनी भरपूर पैंशन के साथ-साथ वे कुशल निवेश के द्वारा भी अपने व्ययों से अधिक कमाते भी रहते हैं। इन अधिकारियों के अलावा कभी विघायक या मंत्री रहे राजनेता और उनके परिवार,उनके दलाल जो अब अपने को लाइजिनिंग आफीसर जैसे नये नाम से पुकारा जाना पसन्द करते हैं,इन्सपैक्टरों जैसी भरपूर कमाई के पदों पर रहे लोगों की भी बहुतायत राजधानी में ही बस जाना पसन्द करती है। इनकी जीवनशैली भी लगभग उपरोक्त लोगों जैसी ही होती है। अपनी अवैध कमाई को निबटाने के लिये ये शानदार बंगलों का निर्माण कराते हैं और जीवन की प्रत्येक सुविधादायी सामग्री खरीद लेते हैं।इन्हीं लोगों की ग्राहकी पाने के लिये भरपूर मुनाफे वाले शोरूम, व साफसुथरे सुपरबाजार भी जगह जगह उगने लगते हैं। राजधानियों के बाजारों का चालीस प्रतिशत हिस्सा सौन्दर्य प्रसाधनों और फेशनेबिल वस्त्रों से पट गया है। इलौक्ट्रानिक्स व सुख देने वाले इलैक्ट्रिकल सामानों पर विदेशी कम्पनियों का वर्चस्व है। उनके मुनाफे की कल्पना तक कठिन है। एल जी का जो टीवी कभी बीस हजार में बेचा जा रहा था वही आज सात हजार में बिकने लगा है जबकि उत्पादन लागत तो बड़ी ही होगी। यही हाल कम्प्यूटरों का है और मोबाइलों का भी है। इन सामानों के सबसे बड़े ग्राहक भी ये राजधानी में बस जाने वाले ये ही लोग हैं। परोक्ष रूप से कहा जा सकता है कि विकसित हो रहे बाजार में भ्रष्टाचार से अर्जित धन की बड़ी हिस्सेदारी है।

केन्द्र में इस समय यू.पी.ए. की सरकार है जो पहले बामपंथियों के समर्थन पर निर्भर थी. बामपंथी अपने प्रभाव का स्तेमाल करते हुये नये टैक्सों या पुराने टैक्सों में वृद्धि नहीं होने दे रहे थे। उनका कहना था कि पूर्व में ही लगाये गये टैक्सों को वसूल किया जाये व छुपाये हुये धन को बाहर निकलवाने के प्रयास किये जायें। उन्होंने सरकार को कुछ उपाय भी सुझाये थे जिनमें से अनेक के लिये सरकार ना नहीं कर सकी थी। वीरप्पा मोइली ने अपनी रिपोर्ट में विश्वास व्यक्त करते हुये कहा है कि यदि उसकी सिफारिशें लागू की जाती हैं तो चार साल में भ्रष्टाचार समाप्त हो सकता है। शेयरों में निवेश करने वालों से पैनकार्ड की अनिवार्यता का पालन कराया जाने लगा है। स्त्रोत पर कर कटौती में डेढ सौ प्रतिशत की वृद्धि हुयी है। आयकर छापों में कुछ बड़ी मछलियां जाल में फंसने लगी हैं। ये सारे संकेत यह दर्शाते हैं कि यदि राजनीतिक हालात ऐसे ही रहे तो भविष्य की दिशा क्या होगी। भ्रष्टाचार से कमाये धन का बड़ा भाग राजधानियों में केन्द्रित है अत: तय है कि इसका प्रभाव राजधानियों के वर्तमान स्वरूप पर भी पड़ेगा। अभी अपनी ऊपरी कमाई को व्यवस्थित करने के लिये अधिकांश नये उपरोक्त राजधानीवासियों ने कई कई प्लाट, या फलैट डाल रखे हैं जिनकी निरन्तर मूल्यवृद्धि हो रही है। यदि वीरप्पा मोइली की रिपोर्ट लागू होगी तो सबसे अधिक प्रभाव इनकी कीमतों पर ही पड़ेगा। राजधानियों के अनियंत्रित फैलाव और बिल्डरों के व्यापार पर भी इसका प्रभाव सम्भव है । जो बाजार भ्रष्टाचार से अर्जित धन पर फल फूल रहा है उस बाजार पर अंकुश लगेगा।

2 टिप्‍पणियां:

  1. समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करते हुए हकीकत बयान करने वाला अति-उत्तम आलेख . मेरे कई भ्रष्ट मित्र जयपुर में डेरा डाले हुए है. सरकार की दुखती रग उनके हाथों में रहती है . काश ! सरकार सही समय पर जागे !
    बहुत बहुत धन्यवाद ,वीरेन्द्रजी , समाज के प्रतिबिम्ब को दिखाने के लिए .

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  2. अच्‍छी पोस्‍ट। आपके ब्‍लाग पर आना सार्थक हुआ।

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