मंगलवार, दिसंबर 29, 2009

तिवारी प्रकरण के कुछ दूसरे कोण्

तिवारी प्रकरण के कुछ दूसरे कोण
वीरेन्द्र जैन
वैसे तो कई लोगों ने इस घटना पर तरह तरह के सन्देह करते हुये तब भी जाँच की माँग की है जब लोग जाँच के नाम से ही घृणा करने लगे हैं, किंतु मैं इस विषय पर कुछ वस्तुनिष्ठ [आब्जेक्टिव] रूप से बात करना चाहता हूं, और यह मान कर बात करना चाहता हूं कि कथित घटना अक्षरशः वैसी ही है जैसी बतायी जा रही है।
मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि ऐसे मामलों में अधिक रुचि का प्रदर्शन समाज में व्याप्त कुण्ठाओं के कारण होता है। लोग ऐसे प्रकरणों में सामाजिक कारणों की जगह व्यक्तिगत रूप में रस लेने के कारण उस पर गलत दिशा में अतिरिक्त महत्व देने लगते हैं जिससे कई बार घटना की असली भयावहता पर ध्यान नहीं जाता। कथित घटना के कई अन्य पहलू भी हैं, जैसे-
राज्यपाल यदि राज्य में किसी को राज्य सरकार के मंत्रियों की तरह खदानें और पट्टे देने का वादा कर रहा है तो तय है कि राज्य शासन भी कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ कर रहा है जो राज्यपाल की अनाधिकार सिफारिश पर गलत काम कर देता रहा है। यह इसलिये भी महत्वपूर्ण है कि पिछले दिनों राज्य के मुख्यमंत्री एक दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं [जिसकी जाँच जारी है] और उनकी सम्पत्ति के व्योरे और उस सम्पत्ति को अर्जित करने का काल चौंकाने वाला है।
एक नक्सल प्रभावित राज्य के राजभवन में सुरक्षा तंत्र को धता बताते हुये यदि स्टिंग आपरेशन सम्भव हो रहा है और बिना रोक टोक के वीडियो केमरा तक अन्दर पहुँच रहा है तो इसका मतलब है कि सुरक्षा तंत्र में कहीं बड़ी चूक है। ऐसी चूक देश के लिये बहुत मँहगी पड़ सकती है।यही हाल संसद भवन में नोटों की गिड्डियाँ पहुँचने के मामले का भी रहा है जिसकी जाँच को दबा दिया गया।
दिवंगत मुख्य मंत्री के पुत्र ने जो खुद एक संसद सदस्य भी हैं खुद को मुख्य मंत्री चुने जाने के लिये कांग्रेस हाईकमान के आदेशों निर्देशों की अनदेखी करना और खुली गुटबाज़ी का प्रदर्शन किया है और निरपेक्ष पत्रकारों का मानना है कि आन्ध्र प्रदेश के ताज़ा हालात के लिये कांग्रेस की गुटबाज़ी भी ज़िम्मेवार है। ये स्टिंग आपरेशन जिस समय प्रकाश में आया है उससे इस सम्भावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि इसका आन्ध्र के ताज़ा हालात से कोई सम्बन्ध हो!
भारतीय समाज में रहने वाले किसी राज नेता की 86 वर्ष की उम्र में भी सेक्स पर ऐसे नियंत्रण की कमी कि एक व्यक्ति जो देश के सर्वोच्च पद तक पहुँचते पहुँचते रह गया हो, अपना राजनीतिक कैरियर दाँव पर लगा दे। काम तो स्वाभिक है, प्राकृतिक है, पर अपनी सामाजिक भूमिका के अनुसार उस पर नियंत्रण रखा जाता है। जिसे उसके वशीभूत होकर सामाजिक नैतिक दायित्व ही दिखाई न दे, हमारे देश में ऐसे व्यक्ति को कामान्ध के नाम से पुकारा गया है।
कुछ लोग इसे बिल क्लिंटन और मोनिका लेविंस्की वाले मामले से तुलना करने लगे हैं किंतु दोनों में ही मूलभूत अंतर यह है कि बिल और मोनिका के बीच उपजे सम्बन्ध कार्यालय में साथ काम करने से उपजे सम्बन्ध हैं, जबकि उक्त सम्बन्ध विशेष रूप से इसी काम के लिये आमंत्रित की गयी लड़कियों के साथ बनाये गये सम्बंध हैं। मोनिका ने क्लिंटन के साथ सम्बन्धों को स्वयं स्वीकारते हुये आरोप लगाया था किंतु इस मामले में स्टिंग आपरेशन के द्वारा खुलासा हुआ है और सम्बन्धित लड़कियाँ सामने नहीं आयी हैं। अंततः क्लिंटन ने सब स्वीकार कर लिया था किंतु तिवारी जी इंकार किये जा रहे हैं और इसे षड़यंत्र बतला रहे हैं। उनकी राजनीतिक महात्वाकांक्षायें अभी भी शेष हैं।

अब सवाल यह है कि जब उजागर हो गये क्रिस्टीन कीलर कांड में अमेरिका इंगलेंड, पाकिस्तान रूस, आदि के राजनेताओं से लेकर माओ, बिल- क्लिंटन, आदि बहुत सारे लोग शक्ति पाने के बाद अपना अंतिम लक्ष्य सेक्स को बनाते रहे हैं तो क्या राजनीति में सेक्स की भूमिका और सेक्स की नैतिकता पर पुनर्विचार नहीं किया जाना चाहिये? गान्धी जैसे महात्मा ने भी अपने अंतिम वर्षों में अपने ब्रम्हचर्य को परीक्षा के लिये प्रस्तुत करना चाहा था। आरोपित ब्रम्हचर्य वाले बहुत सारे सामाजिक धार्मिक संगठनों के लोगों की सच्चाइयाँ रोज खुल रही हैं और उससे हज़ारों गुना दबी ढकी रह जाती हैं। रजनीश ने अपने समय में बहुत सही सवाल उठाया था कि इस विषय को दबा छुपा कर नहीं रखना चाहिये। अप्राकृतिक वर्जनाओं से जो छद्म पैदा होता है वह समाज को झूठा बना कर कहीं अधिक बड़ा नुकसान करता है।
किसी के द्वारा अपनी प्राकृतिक कमजोरी को छद्म पूर्वक उज़ागर कर दिये जाने से उसके ढेर सारे योगदान क्या धूल में मिला दिये जाना चाहिये? वे तब अपराधी बनते हैं जब वे सच्चाई से इंकार करते हैं और झूठे आदमी को समाज के नेतृत्व का अधिकार नहीं दिया जा सकता।
वीरेन्द्र जैन
2/1 शालीमार स्टर्लिंग रायसेन रोड
अप्सरा टाकीज के पास भोपाल मप्र
फोन 9425674629

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत संतुलित और विचारणीय आलेख ! सचमुच किसी बड़े षड्यंत्र की बू आ रही है !

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  2. निश्चित रूप से सब कुछ उतना ही नहीं है जितना मीडिया ने दिखाया.. कुछ तो और है जरूर।

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  3. भारतीय नेता या प्रसिद्ध लोग कभी अपना दोष स्‍वीकार नहीं करते । यह भारतीयो का एक खास लक्षण हैं ।

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