सोमवार, फ़रवरी 15, 2010

श्री कैलाश गुरुस्वामी का एक सड़क दुर्घटना में निधन्


एक दुखद समाचार
गज़ल की व्याकरण के उस्ताद कैलाश गुरू स्वामी का एक दुर्घटना में निधन
हमें अपने ब्लागर मित्रों को यह सूचना देते हुये अत्यंत दुख है कि गज़ल की व्याकरण के उस्ताद सीहोर निवासी श्री कैलाश गुरू स्वामी गत 14 फरबरी की रात्रि को भोपाल से सीहोर लौटते हुये एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गये थे। उन्हें रात्रि में ही भोपाल के चिरायु अस्पताल में लाया गया था जहाँ प्रातः ग्यारह बज़े उनकी हालत बिगड़ गयी और दोपहर तीन बज़े उक्त अस्पताल के डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। श्री गुरु स्वामी गज़ल की व्याकरण के ज्ञाता ही नहीं थे अपितु देश के कई प्रतिष्ठित शायर अपने कलाम को अवाम के सामने लाने से पहले एक बार उनकी पारखी नज़रों से नाप तौल कराना ज़रूरी समझते थे। वे उन्हें बेलिहाज़ मशविरा देते थे जिसे वे पूरे सम्मान के साथ स्वीकार करते थे। अभी हाल ही में उरूज़ पर उनकी एक पुस्तक हिन्दी में नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित होने की जानकारी को उनके पूरे व्यक्तित्व और कृतित्व के साथ हिन्दी के व्यापक सर्कुलेशन वाले समाचार पत्र दैनिक भास्कर ने मुख पृष्ठ पर प्रकाशित किया था। श्री गुरूस्वामी मध्य प्रदेश सरकार के कार्यालय में भोपाल में पदस्थ थे। श्री पंकज सुबीर, श्री राम मेश्राम, श्री अनवारे इस्लाम सहित अनेक लोग अंतिम समय तक अस्पताल में उनके स्वास्थ लाभ के लिये प्रयास रत रहे।

4 टिप्‍पणियां:

  1. अति दुखद.

    पिछली भारत यात्रा के दौरान कैलाश गुरूस्वामी जी से कई बार फोन पर बातचीत हुई.

    एकाएक विश्वास ही नहीं होता.

    ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे.

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  2. बहुत ही दुखद खबर है ...इश्वर से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूँ...अभी कुछ दिनों पहले ही एक मुशायरे की रपट पंकज जी के ब्लॉग पर पढ़ी थी जिसमें उन्होंने अध्यक्षता की थी और आपने भी ग़ज़ल पठन किया था...
    नीरज

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  3. Shri Kailash Guruswami ji ke dukhad nidhan ki jankari ek mitra dwara do din pahale hi mili thi.Aaj blogvani par yah samachar padhkar behad dukh hua. Ve nishchit hi ghazal vidha ek vidwan the. Vibhinna patra patrikaon men unke ghazal sambandhi lekh prakashit hote rahate the. Unke nidhan se ghazal ko ek apoorniya kshati hui hai.Bhagwan unki atma ko shanti de aur unke parivar ko is dukh ko sahan karane ki
    shakti de.
    Chandrabhan Bhardwaj

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